नीमराना (रमेशचंद), 17 अप्रैल 2026। एनआईआईटी यूनिवर्सिटी, नीमराना परिसर में तृतीय डॉक्टरल संगोष्ठी 2026 का भव्य शुभारंभ गुरुवार को हुआ। “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में शोध उत्कृष्टता” विषय पर केंद्रित यह दो दिवसीय शैक्षणिक आयोजन 17 से 18 अप्रैल 2026 तक चलेगा, जिसमें देशभर से प्रख्यात शिक्षाविद, शोधकर्ता एवं शोधार्थी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. प्रकाश गोपालन के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने शोध-आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय नवाचार, अंतःविषयक सहयोग एवं सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने शोधार्थियों को जिज्ञासा, कठोर परिश्रम एवं उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण के साथ शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक राजेंद्र सिंह पवार ने उद्घाटन उद्बोधन में भविष्योन्मुख शैक्षणिक संस्थान के निर्माण की अपनी परिकल्पना साझा की। उन्होंने वास्तविक समस्याओं के समाधान में डॉक्टरल शोध की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए शोधार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. दीपक बी. फाटक ने “एआई के रोमांचक युग में शोध” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध पद्धतियों को किस तरह परिवर्तित कर रही है और इस बदलते परिदृश्य में मानवीय विवेक, नैतिकता एवं समालोचनात्मक चिंतन का महत्व और बढ़ गया है।

डॉ. फाटक ने कहा कि शोध में शुचिता बनाए रखना, सुदृढ़ पद्धतियों को अपनाना तथा एआई को सहायक उपकरण के रूप में उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने एआई आधारित प्रणालियों में पक्षपात, जवाबदेही एवं पारदर्शिता जैसे नैतिक मुद्दों पर भी विशेष ध्यान आकर्षित किया। उद्घाटन सत्र में संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं विशिष्ट अतिथियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही, जिससे संगोष्ठी के लिए एक सशक्त शैक्षणिक वातावरण स्थापित हुआ।

यह डॉक्टरल संगोष्ठी शोधार्थियों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने, अंतःविषयक संवाद को बढ़ावा देने तथा उच्च गुणवत्ता वाले शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। यह आयोजन एनआईआईटी यूनिवर्सिटी की शोध उत्कृष्टता को बढ़ावा देने एवं भविष्य के अकादमिक व औद्योगिक नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।