नीमराना (रमेशचंद) , 21 मार्च 2026 – रैफल्स लॉ स्कूल, रैफल्स विश्वविद्यालय, नीकी में “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के समग्र कल्याण” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों, संरक्षण एवं कल्याण के प्रति विधिक जागरूकता को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की शुरुआत माननीय अध्यक्ष, प्रो. राजेन्द्र सिंह सांगवान के मुख्य वक्तव्य से हुई, जिसमें उन्होंने वर्तमान सामाजिक-वैधानिक परिप्रेक्ष्य में इस अधिनियम की बढ़ती प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते पारिवारिक ढांचे के कारण वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा के मामलों में वृद्धि हो रही है तथा उनकी गरिमा और कल्याण की रक्षा हेतु संसद द्वारा बनाए गए इस प्रगतिशील कानून की सराहना की।

विधि संकाय के डीन, डॉ. प्रणय कुमार आदित्य ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के समक्ष उपस्थित समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बढ़ते दुर्व्यवहार के मामलों से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों जैसे भरण-पोषण के अधिकार, मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल तथा त्वरित एवं प्रभावी निवारण की व्यवस्था को स्पष्ट किया। कार्यक्रम में डॉ. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा का कारण अधिकार-केंद्रित समाज का बढ़ता प्रभाव है। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं परंपराओं के पालन पर बल देते हुए कहा कि इससे इस प्रकार की समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। आदित्य प्रताप सिंह, विधि संकाय ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित ऐतिहासिक एवं संवैधानिक ढांचे पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 के अधिनियम से पूर्व भी धारा 125 सीआरपीसी (अब धारा 144 बीएनएसएस), हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20 तथा महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत उपाय उपलब्ध थे। उन्होंने यह भी बताया कि इस अधिनियम का उद्देश्य भरण-पोषण के दावों के लिए सरल, सस्ता एवं त्वरित तंत्र उपलब्ध कराना है। साथ ही उन्होंने उर्मिला दीक्षित बनाम सुनील शरण दीक्षित, (2025) एससीसी के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और देखभाल सुनिश्चित करने में समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के डीन, शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे संस्था की विधिक जागरूकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता पुनः सुदृढ़ हुई।