नीमराना (रमेशचंद), 29 मार्च। कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नीमराना में एल.एन. हॉस्पिटल में जिले के पहले आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर का शुभारंभ किया गया है। इस सेंटर के शुरू होने से अब संतान सुख से वंचित दंपतियों को आईवीएफ उपचार के लिए दिल्ली या गुड़गांव जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, उन्हें यह सुविधा अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी। आईवीएफ एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें शरीर के बाहर स्पर्म और एग को फर्टिलाइज कर भ्रूण तैयार किया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह प्रक्रिया उन दंपतियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रहे हैं।

आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. प्रेक्षा अग्रवाल ने बताया कि आईवीएफ की जरूरत तब पड़ती है जब पुरुष में स्पर्म काउंट कम हो, स्पर्म की मोटिलिटी कम हो, महिला की फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक हो, या दंपति की उम्र अधिक हो और लंबे समय से गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो। ऐसे मामलों में आईवीएफ एक प्रभावी विकल्प साबित होता है। आईवीएफ प्रक्रिया में महिला की ओवरी से एग निकालकर लैब में स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। इसके बाद तैयार भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जहां से गर्भावस्था की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
नीमराना स्थित एल.एन. हॉस्पिटल जिले का एकमात्र रजिस्टर्ड आईवीएफ सेंटर है, जहां आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की टीम द्वारा आईवीएफ सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इस सेंटर के शुरू होने से क्षेत्र के दंपतियों को अब बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय व खर्च दोनों की बचत होगी। आईवीएफ एक सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है, जो कई दंपतियों को माता-पिता बनने का सुख दे सकती है।